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स्वयं सहायता समूह की महिलाएं बना रही दीवाली की इको फ्रेंडली मूर्तियां





स्वयं सहायता समूह की महिलाएं बना रही दीवाली की इको फ्रेंडली मूर्तियां


बायोवेद अनुसंधान, कृषि और टेक्नोलॉजी संस्थान दे रहा प्रशिक्षण

प्रयागराज। प्रयागराज के ग्रामीण इलाकों के स्वयं सहायता समूह की महिलाएं दीवाली पर इको फ्रेंडली मूर्तियां बना रही हैं। गाय के गोबर, लाख और साफ गोमूत्र से बनी यह मूर्तियां पर्यावरण के अनुकूल हैं। इन मूर्तियों की मांग न केवल प्रयागराज में बल्कि दिल्ली और कोलकाता तक के बाजारों में भी है। कौंडीहार,शंकरगढ़, होलागढ़, हंडिया जैसे ग्रामीण इलाकों में कार्यरत स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को बायोवेद अनुसंधान कृषि एवं टेक्नोलॉजी संस्थान ने प्रशिक्षित किया है। बायो वेद के निदेशक बृजेश द्विवेदी ने बताया कि उनके संस्थान लाख पर आधारित उत्पाद को बनाने के लिए विशेष प्रशिक्षण महिलाओं को दे रहा है। पिछले साल से गाय के गोबर और लाख से बने उत्पाद का प्रशिक्षण भी शुरू किया गया है। इस बार दीवाली पर मूर्तियां भी बनाई जा रही हैं। जिनकी अत्यधिक मांग है। इको फ्रेंडली होने के साथ ही यह हल्की, टिकाऊ और कम लागत की होती हैं।

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