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अरैल के चक्र माधव समेत द्वादश माधव मंदिर का होगा जीर्णोधार






अरैल के चक्र माधव समेत द्वादश माधव मंदिर का होगा जीर्णोधार

महाकुंभ 2025 के मद्देनजर पर्यटन विभाग ने बनाई योजना

नैनी। प्रयागराज में स्थित द्वादश (बारह) माधव मंदिर के पुनर्गठन की योजना पर्यटन विभाग द्वारा बनाई गई है। महाकुंभ 2025 के आयोजन से पूर्व इस योजना को पूरा करने की रूपरेखा बनाई जा रही है। बताया जाता है कि धार्मिक आस्था और विश्वास के आधार पर मंदिरों का पुनर्गठन किया जाएगा। इसके साथ ही प्रत्येक मंदिर में पीने के लिए पानी,छायादार स्थान,बैठने का स्थान और शौचालय का व्यस्था की जाएगी। मंदिर तक पहुंच मार्ग की मरम्मत की जाएगी। क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी अपराजिता सिंह के अनुसार जीर्णोधार के लिए प्रोजेक्ट तैयार किया जा रहा है। द्वादश माधव मंदिर का धार्मिक महत्व है। हर साल लगने वाले माघ मेला के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं में आस्था का प्रतीक है। मान्यता है कि ब्रह्मांड की स्थापना के बाद ब्रम्हा ने प्रयागराज में द्वादश माधव की स्थापना की थी।  ऐसा विश्वास किया जाता है कि द्वादश माधव की परिक्रमा के बाद ही कल्पवास और संगम में स्नान का फल प्राप्त होता है। उचित रखरखाव के अभाव में मुगल और ब्रिटिश काल में द्वादश माधव मंदिर की स्थिति खराब होती चली गई। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की हरि गिरी ने परिक्रमा की परंपरा फिर शुरू की है। मान्यता के अनुसार दारागंज में बेनीमाधव, गंगा यमुना के मध्य अक्षयवट माधव, नागवासुकी मंदिर में अनंत माधव और असी माधव, द्रौपदी घाट में बिंदु माधव, संगम में जल के रूप में श्रीआदि माधव, अरैल में चक्र माधव, छिवकी के समीप श्रीगदा माधव, देवरिया गांव में पद्म माधव, झूंसी में संक्थार माधव और छतनाग में शंखमाधव स्थित है।

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