प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल कर रहा भारतीय खाद्य निगम
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तकनीक को किया गया लागू
नैनी। भारतीय खाद्य निगम के अधीन खाद्य संग्रह भंडार नैनी में शुक्रवार को एक प्रेस वार्ता में भारतीय खाद्य निगम के मंडल प्रबंधक बजरंग लाल ने बताया कि भारतीय खाद्य निगम की व्यवस्था के अंतर्गत पारदर्शिता बरतते हुए अनाज की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए ऑटोमेटेड ग्रेन एनालाइजर जैसी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित तकनीक का प्रयोग कर अनाज की क्वालिटी और नमी जैसे पैरामीटर पर निगाह रखी जा रही है। जिसे भारतीय खाद्य निगम के मंडल कार्यालय के अधीन संग्रह केंद्र पर लागू किया गया है। इसके साथ ही साथ मिक्सड इंडिकेटर मेथड से पुराने चावल और नए चावल की पहचान सुनिश्चित की जा रही है। जिससे बाजार के पुराने चावल के फिर क्रय केंद्र पर खरीद के लिए पहुंचने की संभावनाओं पर अंकुश लगाया जा रहा है। इसके साथ ही संग्रह केंद्रों पर दैनिक संचालन के लिए डिपो ऑनलाइन सिस्टम, बिलों के भुगतान के लिए संग्रह केदो में बीटीएस, निविदा एवं खरीद के लिए जेईएम को लागू किया गया है। उन्होंने आगे बताया कि वित्त वर्ष 2023 - 24 से बाजार में गेहूं की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए लघु आटा चक्की व खुदरा विक्रेताओं को प्रति सप्ताह खाद्यान्न की नीलामी की जा रही है जिसमें गेहूं का रिजर्व प्राइस 2150 रुपए रखा गया है। भारत सरकार की सभी कल्याणकारी योजनाओं में फोर्टीफाइड चावल का वितरण भी सुनिश्चित किया जा रहा है। करोना महामारी के दौरान भारतीय खाद्य निगम द्वारा अप्रैल 2020 से मार्च 2022 के मध्य उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम एवं प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्य योजना के तहत 317.44 लाख मैट्रिक टन खाद्यान्न निर्गत किया गया। इस अवसर पर सहायक मंडल महाप्रबंधक सप्त ऋषि, आरएमओ भीमचंद्र गौतम, डीएफएमओ को विपिन कुमार व अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे। महामारी के दौरान भारतीय खाद्य निगम द्वारा अप्रैल 2020 से मार्च 2022 के मध्य उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम एवं प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्य योजना के तहत 317.44 लाख मैट्रिक टन खाद्यान्न निर्गत किया गया। इस अवसर पर सहायक मंडल महाप्रबंधक सप्त ऋषि, आरएमओ भीमचंद्र गौतम, डीएफएमओ को विपिन कुमार व अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे। 












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