केले पर आधारित टिश्यू कल्चर लैब स्थापित
पूर्वांचल का एक मात्र लैब कौशांबी में प्राइवेट फर्म द्वारा
प्रयागराज। केले के खेती के लिए कौशांबी प्रदेश भर में प्रसिद्ध है। यहां पंद्रह हजार किसान करीब सत्रह हजार हेक्टेयर में केले की खेती करते हैं। अभी तक ये किसान इस खेती में भारी लागत से परेशान रहते है। किसानों की यह समस्या अब काफी हद तक दूर होती दिखाई दे रही है। कौशांबी के चिल्ला शाह बाजी गांव में एक प्राइवेट निवेशक द्वारा ' टिश्यू कल्चर लैब ' की स्थापना उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से किया जा रहा है। पूर्वांचल में अपनी तरह का यह पहला लैब लगभग तीन करोड़ की लागत से तैयार हो रहा है। प्रथम इंटरप्राइजेज, प्रयागराज की तरफ से स्थापित इस लैब को हॉर्टिकल्चर एंड फूड प्रोसेसिंग विभाग की मदद से तैयार किया गया है। लैब से बेहतर उत्पादन क्षमता वाले 30 लाख टिश्यू कल्चर केले के पौधे किसानों को उपलब्ध कराए जाएंगे। अभी तक किसान इस तरह के पौधों को महाराष्ट्र और बंगाल से मांगते थे। जिससे खेती की लागत बढ़ जाती थी। अब यही पौधे उन्हें लैब के माध्यम से क्षेत्र में उपलब्ध होंगे। इसके साथ ही साथ पूर्वांचल के गोरखपुर, कुशीनगर ,महाराजगंज और सिद्धार्थनगर जैसे जिलों में जहां केले की खेती बड़े पैमाने पर होती है, टिशु कल्चर लैब के माध्यम से केले की उन्नत किस्म किसानों को उपलब्ध कराई जाएगी। पूर्वांचल में इस तरह के लैब की कमी महसूस की जा रही थी। इस लैब की मदद से उत्पादन तो उत्पादन में वृद्धि तो होगी ही, इसके साथ ही साथ किसानों की आय भी बढ़ेगी।













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