प्रयागराज के मूंज उत्पाद को जीआई टैग की तैयारी
इलाहाबादी अमरुद को पहले ही मिल चुका है जीआई टैग
प्रयागराज। राज्य सरकार के एक जिला एक उत्पाद के अंतर्गत सूचीबद्ध प्रयागराज के मूंज उत्पाद को जीआई टैग मिल सकता है। इसके लिए जिला प्रशासन ने केंद्र सरकार को अनुरोध किया है। जीआई टैग मिलने के बाद मूंज उत्पाद को निर्यात की नई ऊंचाइयां मिलने की उम्मीद है। कुछ समय पहले विकास भवन में संपन्न जिला टैग कमेटी ने इसके संबंध में एक औपचारिक प्रार्थना पत्र केंद्र सरकार को भेजा है। इसके पहले सन 2007- 2008 में इलाहाबादी अमरूद को जीआई टैग मिल चुका है। पिछले कुछ सालों से मूंज उत्पाद में बदलाव देखने को मिला है। विभिन्न आकार की टोकरियों से आकर्षक ज्वेलरी और सजावटी वस्तुओं के निर्माण में आजकल मूंज का प्रयोग हो रहा है। लेकिन विदेशों में निर्यात को लेकर कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। मूंज उत्पादों के निर्माण में मुख्यतः औरतें शामिल होती हैं। ऐसे में इसके निर्यात प्रोत्साहन से औरतों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति बेहतर हो सकेगी। मूंज एक तरह की जंगली घास होती है। जो यमुना नदी के किनारे पर प्रयागराज में बहुतायत में पाई जाती है। मूंज, इस घास की ऊपरी सतह को छीलकर बनाया जाता है और इससे दशकों पहले से उत्पाद बनाए जा रहे हैं। प्रयागराज के चाका ब्लाक में महेवा, डांडी और मडौका आदि गांव में महिलाएं कई तरह की टोकरी, बैग, सजावट के समान, पेन स्टैंड के साथ ही साथ ज्वेलरी जैसे उत्पाद गोवा, नई दिल्ली, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, गुजरात और राजस्थान भेज रही हैं।













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