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| बैलों की चहलकदमी से बिजली उत्पादन |
गौवंश की चहलकदमी बनेगी बिजली
अनूठी योजना पर लखनऊ श्रीधाम गौशाला पर हो रहा है काम
लखनऊ। किसानों के लिए निराश्रित गोवंश बड़ी समस्या बनते जा रहे हैं। गोवंश में सबसे बड़ी बाधा दूध न देने वाले पशु यानी बछड़े और बैल ही बनते हैं। जिनकी ज्यादा वेल्यू नहीं होती है। यही वजह है कि किसान और पशुपालक इनके बड़े होते ही सड़कों पर छोड़ देते हैं । यही गोवंश खेतों में आतंक मचाते हैं और फैसले बर्बाद कर देते हैं। अब यही गोवंश कमाई का साधन बन सकते हैं। ऐसी तकनीक पर काम किया जा रहा है जिससे यह गोवंश खुद ही अपने चारे का इंतजाम कर पाएंगे और इससे बिजली का उत्पादन भी मिल जाएगा। लखनऊ से कुछ किलोमीटर दूर गोसाईगंज के सिद्ध पुरवा गांव मैं एक ऐसे ही मॉडल पर काम चल रहा है। यहां श्रीधाम गौशाला में ट्रेड मिल पर बैलों को चलकर बिजली उत्पादित किया जा रहा है। इस कांसेप्ट को नदी रथ का नाम दिया गया। इस रथ पर बैलों की जोड़ी चहल कदमी करती है और जनरेटर कुछ सेकंड में 1500 आरपीएम तक घूमने लगता है। इससे इतनी बिजली पैदा होती है कि 1 मिनट में पंप सेट 4 इंच का पानी देने लगता है। नंदी रथ में लगा हुआ पद 30 डिग्री तक उठा हुआ है। बैलों की जोड़ी के चलने से इस पर लगे रोलर घूमने लगते हैं। बैलों की सामान्य चल से भी पैड रोलर घूमते हैं जिससे जनरेटर से बिजली उत्पादन शुरू हो जाता है। इस पैड रोलर पर बैलों के चारे की भी सुविधा है। बैल चारा खाते हुए पैड पर चलते भी रहते हैं। दरअसल बैल चलते नहीं बल्कि गुरुत्वाकर्षण के कारण लॉन्च पैड चलता है। तो उसके साथ बैल खुद को रोकने के लिए आगे पीछे होते हैं। श्रीधाम गौशाला के शैलेंद्र सिंह के अनुसार यदि सरकार इस युक्ति पर ध्यान दें तो निराश्रित गोवंश की समस्या से निपटारा तो मिल ही सकता है इसके साथ ही साथ ग्रामीण स्तर पर बिजली की समस्या से भी निजात पाया जा सकता है।













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